सावन का महिना  बहुत ही रोमांटिक होता है। इस महीने में लोग झूला झूलते हैं, घूमने जाते हैं, बारिश में भीगते हैं। लेकिन भारत के कई इलाकों में इस महीने में नंगे बदन पांच दिन रहने का अनोखा रिवाज है। हिमाचल प्रदेश के एक गांव में ये रिवाज है की यहां सावन के पांच दिन महिलाएं बिना कपड़ो के रहती हैं।

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इस मांगलिक क्रियाओं में महिला अपने बदन पर एक भी कपड़ा नहीं पहन सकती हैं। असल में यहां मणिकर्ण घाटी में एक पीणी नाम का गांव है। यहां की परंपरा है कि पत्‍नी को एक निश्चित समय में पांच दिनों तक बिना कपड़ों के रहना होता है। इस अवधि में ये पति और पत्‍नी का आपस में बातचीत करना और हंसी मजाक करना भी निषेध होता है।

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इन पांच दिनों में गांव में मदिरापान भी निषेध होता है। यह प्रथा बहुत पुरानी बताई जाती है। इसका पालन करने वाले पूरी गंभीरता से अपना कर्तव्‍य निभाते हैं। ये पांच दिन सावन के महीने में आते हैं। मान्‍यता है कि इस समय पति एवं पत्‍नी को निकट नहीं आना चाहिए, यदि ऐसा होता है तो यह किसी अनिष्‍ट का संकेत है। इस अनिष्‍ट को टालने के लिए पांच दिनों के इस निषेध को अंगीकार किया जाता है।

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इस अवधि में महिलाएं ऊन से बने पट्टू ओढ़ती हैं। हालांकि इस परंपरा का कोई लिखित प्रमाण नहीं है लेकिन मान्‍यता है कि लाहुआ घोंड देवताओं ने पीणी पहुंचकर राक्षसों का संहार किया था। उस कथा के परिपालन में ही इस परंपरा का निर्वाह किया जाता है।

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