रघुराम राजन को पढ़ाने वाले इस प्रोफेसर ने छोड़ा घर, आदिवासियों को कर रहे हैं शिक्षित

हमारे समाज को शिक्षित करने का जिम्मा गुरु का है और इसीलिए कहा भी जाता है कि हर गुरु की पहचान उसके छात्र से होती है और वो अपने छात्रों को काबिल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता है।शिक्षित

वहीं कुछ टीचर ऐसे भी होते है जो बहुत आगे की और अलग काम करने की सोचते हैं और ऐसे ही एक शख्स हैं दिल्ली आइआइटी से पूर्व प्रोफेसर और पूर्व आरबीआइ गवर्नर रघुराम राजन के टीचर आलोक सागर। जिन्होंने 26 साल पहले ही टीचिंग के प्रोफेशन को छोड़ आदिवासी लोगों को सेवा में लग गए।

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आलोक सागर पिछले 32 सालों से मध्य प्रदेश की आदिवासी गांव में वहां रह रहे लोगों को शिक्षित कर उनकी सेवा कर रहे हैं। जब आलोक दिल्ली आइआइटी में पढ़ाते थे। तो उन्होंने ऐसे स्टूडेंट्स तैयार किए जो आज देश में सराहनय काम कर रहे हैं और उन्हीं में से एक हैं पूर्व आरबीआइ गवर्नर रघुराम राजन। स्पीकिंग ट्रीज की रिपोर्ट के मुताबिक, जब आलोक ने अपने जॉब से रिजाइन दिया तो उन्होंने मध्य प्रदेश के आदिवासी गांव बैतूल में समाज सेवा का काम शुरू कर दिया। 26 सालों से वहां के लोगों के लिए काम कर रहे हैं और शिक्षित कर रहे हैं। कोचामू राजधानी भोपाल से तकरीबन 165 किलोमीटर दूर बैतुल जिले में पड़ता है। करीब 750 की आबादी वाले इस गांव में आज तक बिजली नहीं पहुंची है और कभी बनाई गई कच्ची सड़क भी अब पगडंडी की तरह नजर आती है। गांव में शिक्षा के नाम पर प्राइमरी स्कूल है और ग्रामीणों का स्वास्थ्य फिलहाल भगवान भरोसे ही ठीक-ठाक है।

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