आपको ये जानकर शायद आश्चर्य होगा, लेकिन बिहार के चाय और पान की दुकानों के कॉलेज चलते थे और इन कालेजों से टॉपर्स भी निकलते थे। बिहार में टॉपर्स घोटाले का खुलासा होने के बाद कॉलेजों की खोज खबर लिए जाने पर बड़ा खुलासा हुआ है। कुल 52 इंटर कॉलेजों ने अपना जो पता दे रखा था, उस जगह पर चाय और आटा-चक्की की दुकान चलती मिली। जिस पर बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड(बीएसईबी) ने इनकी मान्यता खत्म कर दी है। इससे पता चलता है कि बिहार में फर्जी टॉपर पैदा करने के लिए किस तरह से सुनियोजित कारोबार चल रहा था।

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मतलब साफ़ है कि ये 52 इंटर कॉलेज सिर्फ़ कागजों पर चल रहे थे। इसमें छात्रों की फर्जी हाजिरी लगाकर उन्हें उपस्थित दिखाया जाता था और शिक्षकों की नियुक्ति भी कागजी मिली। जांच टीम जब कॉलेजों के पते की तस्दीक करने पहुंची तो हाल देखकर चौंक गई। लोगों ने बताया कि यहां तो कोई कॉलेज ही नहीं चलता है।

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बिहार बोर्ड के पूर्व प्रेसीडेंट लालकेश्वर सिंह के समय इन फर्जी कॉलेजों का सत्यापन किेए बगैर मान्यता दी गई। इसके लिए शिक्षा माफियाओं से करोड़ों की डील हुई। टॉपर्स घोटाले का खुलासा होने के बाद बोर्ड के पूर्व प्रेसीडेंट को मुख्य आरोपी बनाया गया। बिहार बोर्ड के प्रेसीडेंट आनंद किशोर ने बताया कि चाय-पान की दुकान और आटा चक्की में चल रहे 52 कॉलेजों की मान्यता तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी गई है। 213 अन्य कॉलेज प्रबंधकों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है। उनके कॉलेज की मान्यता भी संदिग्ध पाई गई है। कॉलेज के लिए जरूरी शर्तें पूरी नहीं हैं। जवाब आते ही आगे की कार्रवाई होगी।

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बिहार शिक्षा बोर्ड के सचिव अनूप कुमार सिन्हा कहते हैं कि बोर्ड फर्जी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं चाहता है। जिन छात्रों का दाखिला इन स्कूलों में हुआ है, उन्हें नजदीक के विद्यालयों में दाखिला दिलाकर वहीं से बोर्ड परीक्षा फॉर्म भराया जाएगा।

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