बांग्लादेश में कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के नेता और मीडिया हस्ती मीर कासिम अली को 1971 में हुए मुक्ति संग्राम के दौरान उसके अपराधों के लिए शनिवार(3 सितंबर) की रात फांसी दे दी गई। अली को राजधानी के बाहर काशीपुर केंद्रीय कारागार में फांसी दी गई।

गृह मंत्री असदुज्जमां खान ने बताया कि ‘‘उसे दस बजकर 35 मिनट (स्थानीय समायुनसार) पर फांसी दी गयी।’’ कल(शुक्रवार) 63 वर्षीय अली ने क्षमादान के लिए राष्ट्रपति के समक्ष गुहार लगाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद आज(3 सितंबर) उसे फांसी दे दी गयी।

Also Read:   तिहाड़ जेल में 30 हजार रोटियां हर महीने होती हैं बर्बाद

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उसकी आखिरी पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद अली के पास खुद को बचाने के लिए केवल राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करने का विकल्प था। इससे पहले अधिकारियों ने अली के परिवार को उससे मिलने के लिए जेल बुलाया था।

Also Read:   Online adverts offering free stay to homeless women in return of sex!

एक निजी चैनल के मुताबिक, ‘‘उसके परिवार के 22 सदस्य उससे (अली) अंतिम बार मिलने जेल पहुंचे।’’ अली को फांसी दिए जाने के साथ ही बांग्लादेश द्वारा 1971 के युद्ध अपराधियों के खिलाफ 2010 में शुरू किए गए अभियान के बाद से अब तक छह युद्ध अपराधियों को फांसी दी गई है।

Also Read:   बाइक सहित बहे युवक को 200 मीटर तैरकर बचाया

 

 

No more articles