पिछले कई सालों से सेक्सवर्धक दवाओं पर विवाद जारी था। महिला संगठन इसे अपने साथ लैंगिक भेदभाव बता रहे थे। पुरुषों की तरह महिलाओं के लिए भी यौन इच्छा बढ़ाने वाली दवा ‘व‌िय‌ाग्रा‘ को जल्द अनुमत‌ि मिल सकती है और वह बाजार में उपलब्ध होगी। अमेरिका में फेडरल एडवाइजरी पैनल ने महिलाओं की सेक्सवर्धक दवा ‘वियाग्रा’  को अनुमति देने की सिफारिश की है।

गौरतलब है कि अमेरिका में महिला संगठनों की ओर से पुरुषों की तरह महिलाओं के लिए भी यौन उत्तेजना बढ़ाने वाली दवा ‘वियाग्रा’  की मांग को लेकर जबर्दस्त आंदोलन चल रहा था। अमेरिका में फूड ऐंड ड्रग एडमिस्ट्रेशन कि एडवाइजरी कमेटी के सदस्यों ने महिलाओं में यौन उत्तेजना बढ़ाने वाली दवा ‘फ्लाइबैन्सरिन’ को छह के मुकाबलों 18 वोटों के साथ अप्रूवल देने की सिफारिश की है।

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इस पिटिशन पर 40 हजार से अधिक लोगों ने साइन किया है। एफडीए इस बिल को दो बार ठुकरा चुका है। एफडीए की दलील थी कि इस दवा से अनिद्रा, थकान जैसी कई शिकायतें होती हैं। हालांकि इस मुहीम के बाद एफडीए ने इस बिल पर दोबारा विचार करने का आश्वासन दिया है। एफडीए के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम किसी किस्म के लैंगिग भेदभाव की बात का खंडन करते हैं।’ अमेरिका में महिलाओं के यौन इच्छा बढ़ाने वाली दवाओं की मांग कोई नई नहीं है. महिलाओं के लिए वियाग्रा का पहला परीक्षण 2004 में हुआ था।
इसी साल एफडीए ने एक एडवाइजरी जारी कर इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद भी वियाग्रा पर परीक्षण चलता रहा। क्या कुछ किया गया, लेकिन लैब परीक्षण में यह भी तय मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसके बाद से ही महिलाओं में उत्तेजना बढ़ाने की दवाओं का मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद महिलाओं से जुड़े कुछ संस्थाओं ने जिसमें राष्ट्रीय महिला नेटवर्क भी शामिल है। इस अभियान का नाम ‘हिसाब बराबर’ रखा गया है। इन संस्थाओं का कहना है कि सेक्स में सिर्फ मर्दों की सुविधा का ख्याल क्यों रखा जाए।

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